सच्चाई यह है कि इराक़ में जारी सुविधाओं के अभाव और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों का रुख़ ईरान के ख़िलाफ़ आक्रोश की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है और इससे पहले भी कई बार इस तरह की कोशिशें की गई हैं। विशेष रूप से इराक़ के गत आम चुनावों के आयोजन और उसके बाद भी इस तरह का प्रयास किया गया था, लेकिन यह प्रयास विफल हो गया था।
हालिया दिनों में भी ख़ून ख़राबा करके इसी तरह की कोशिश की जा रही है, ताकि पूर्व योजना के तहत ईरान और इराक़ के संबंधों को ख़राब किया जा सके। ऐसे संबंध जो दोनों देशों की जनता के बीच सद्दाम, अमरीका और दाइश के ख़िलाफ़ संघर्ष से मज़बूत हुए थे। लेकिन दोनों राष्ट्रों की समझदारी और दूरदर्शिता ने इस बार भी काफ़ी हद तक इन साज़िशों पर पानी फेर दिया है।